बात एक रात की compleet

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rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 12 Dec 2014 04:39

बात एक रात की--82

गतान्क से आगे.................

गौरव को देखते ही दीपिका उसके पास आई और बोली, “सब ठीक तो है ना.”

“नाटक बंद कर और जल्दी से बेडरूम में आजा.” गौरव ने कहा.

गौरव स्वेता का हाथ पकड़ कर बेडरूम की तरफ चल दिया. दीपिका हैरानी में देखती रही. स्वेता और दीपिका की नज़रे टकराई. दीपिका समझ गयी कि गौरव उसे ज़बरदस्ती लाया है वहाँ. दीपिका भी गौरव के पीछे पीछे बेडरूम में आ गयी.

“आप क्या करना चाहते हैं.” दीपिका ने पूछा.

“चुपचाप सोफे पर बैठ जा और कुछ सीख स्वेता से. बहुत अच्छे से देती है चूत ये. तू भी कुछ सीख ले.”

स्वेता चुपचाप खड़ी थी.

“स्वेता सोच क्या रही है. चल निकाल मेरा लंड बाहर और चूसना शुरू कर. मेरी बीवी को सकिंग नही आती. सिखा दे इसे कि सकिंग कैसे की जाती है.” गौरव ने कहा.

“सर इनके सामने मैं कैसे……” स्वेता गिड़गिडाई.

दीपिका वहाँ से जाने लगी तो गौरव ने उसे दबोच लिया और बोला, “स्वेता की चुदाई देखे बिना तू कही नही जाएगी. ”

गौरव ने दीपिका को ज़बरदस्ती वही बिठा दिया, “अगर तू यहाँ से हिली तो तुझे गोली मार दूँगा मैं.”

गौरव ने स्वेता को आवाज़ दी, “इधर आ साली. यही इसकी नज़रो के बिल्कुल सामने सक कर.”

स्वेता नज़रे झुका कर चुपचाप गौरव के पास आ गयी.

“जल्दी से लंड निकाल मेरा बाहर और दिखा इसे कि लंड कैसे चूसा जाता है.” गौरव ने कहा.

स्वेता चुपचाप गौरव के सामने बैठ गयी और उसकी पॅंट की ज़िप खोल कर गौरव के लिंग को बाहर निकाल लिया.

“गुड अब अपने स्टाइल से इसे चूसना शुरू करो.” गौरव ने कहा.

स्वेता ने मूह खोल कर गौरव के लंड को मूह में घुसा लिया और धीरे धीरे चूसने लगी.

“दीपिका देखो किस तरह से चूस रही है ये. इस तरह से चूसना चाहिए तुम्हे लंड को.” गौरव ने कहा.

गौरव ने स्वेता के बाल पकड़ लिए और उसके मूह में धक्के मारने लगा. स्वेता की हालत पतली हो गयी.

कुछ देर तक गौरव यू ही उसके मूह में धक्के मारता रहा. दीपिका ने तो अपनी आँखे बंद कर ली थी.

अचानक गौरव ने अपने लिंग को स्वेता के मूह से निकाल लिया और बोला, “चल अब दीपिका के घुटनो पर हाथ रख कर झुक जा. मेरी बीवी तुझे सपोर्ट देगी और मैं पीछे से तेरी चूत मारूँगा…हाहाहा.”

दीपिका और स्वेता की नज़रे टकराई. बहुत से सवाल थे दोनो की आँखो में. जिनका जवाब दोनो में से किसी के पास नही था.

गौरव ने स्वेता की सलवार का नाडा खोल कर उसे अपने आगे झुका दिया. स्वेता को ना चाहते हुए भी दीपिका के घुटनो पर हाथ रखना पड़ा. एक झटके में लंड डाल दिया गौरव ने स्वेता की चूत में.

“आअहह….सर मेडम के सामने मैं एंजाय नही कर पाउन्गि.” स्वेता ने कराहते हुए कहा.

“ये चुदाई तेरे लिए नही बल्कि मेडम को दिखाने के लिए ही है…हाहहाहा.”

गौरव ने ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने शुरू कर दिया स्वेता के अंदर. शिसकियाँ गूंजने लगी बेडरूम में स्वेता की. गौरव के तेज तेज धक्को के कारण स्वेता के हाथ बार बार दीपिका के घुटनो से हट जाते थे. मगर वो बार बार वापिस घुटनो पर हाथ रख देती थी. दीपिका आँखे बंद किए बैठी थी.

“दीपिका आँखे बंद क्यों कर रखी है. देख कैसे चुदवा रही है ये रंडी…तुझे भी ऐसे ही चुदवाना चाहिए. हाहहाहा”

स्वेता की शिसकियाँ और तेज होती जा रही थी. वो अपने चरम के नज़दीक थी.

“सर…आआहह प्लीज़ रुक जाओ….आअहह.”

“वेरी गुड स्वेता. दीपिका को समझाओ ये सब. कितना मज़ा कर रही हो तुम. इतना मज़ा ये क्यों नही कर सकती.”

गौरव भी झाड़ गया स्वेता के अंदर. उसने फ़ौरन स्वेता की चूत से लंड निकाल लिया और उसे ज़ोर से धक्का दिया एक तरफ, “चल दफ़ा हो जा यहाँ से रंडी कही की. तुझे शरम नही आती हज़्बेंड वाइफ के बीच आकर अपनी चूत मरवाते हुए. जा जहाँ जाना है तुझे. देल्ही जा रही थी ना तू. जा जाकर देल्ही में गान्ड मरवा अपनी. साली रंडी.”

स्वेता ने अपने कपड़े ठीक किए और चुपचाप वहाँ से निकल गयी.

“सन ऑफ आ बिच…” स्वेता ने घर से निकलते हुए कहा.

……………………………………………………………………….

रोहित अपने कॅबिन में ही बैठा था. भोलू अंदर आया तो उसने पूछा, “कुछ पता चला क्या?”

“हां सर 2006 में एक एफआइआर दर्ज हुई थी गौरव मेहरा के खिलाफ. एक शॉपकीपेर ने कंप्लेंट की थी कि गौरव मेहरा ने उसके भाई को उसके ही सामने क्रिकेट बेट से इतना मारा कि वो मर गया. बात सिर्फ़ इतनी थी कि वो कह रहा था कि इंडिया जीतेगा और गौरव मेहरा बेट लगा रहा था कि पाकिस्तान जीतेगा. उन दिनो कोई सीरीस चल रही थी.”

“कोई हैरानी नही हुई मुझे. जैसा उसका बिहेवियर है वो कुछ भी कर सकता है.”

“पर सर बाद में उस केस का कुछ नही बना. गौरव मेहरा के खिलाफ कोई ठोस सबूत नही मिले. और हां सर उस वक्त सब इनस्पेक्टर विजय ज़्यादा ही इंटेरेस्ट ले रहे थे इस केस में.”

“क्या विजय जानता था गौरव को?”

“शायद. मुझे अब याद आ रहा है कि विजय सर ने गौरव के लिए उस वक्त के एएसपी से काफ़ी रिक्वेस्ट की थी. शायद एएसपी साहिब को मोटी रकम भी दी गयी थी केस को रफ़ा दफ़ा करने के लिए.

“उस वक्त तो चौहान भी था ना यहाँ.”

“जी हां वो भी थे. वही तो केस को हॅंडल कर रहे थे.”

“तुम्हे क्या लगता है, क्या चौहान भी गौरव और विजय के साथ मिला हुआ था उस वक्त.” रोहित ने भोलू से पूछा.

“मुझे नही लगता सर कि वो मिले हुए थे. क्योंकि अगर ऐसा होता तो उन्हे एएसपी साहिब की सिफारिस लगाने की ज़रूरत ना पड़ती. हां शायद उन पर दबाव बनाया गया और दबाव में आकर उन्होने कोई आक्षन नही लिया.” भोलू ने कहा.

“ह्म्म…ठीक है तुम जाओ” रोहित ने कहा.

भोलू के जाने के बाद रोहित गहरी सोच में डूब गया.

अगली सुबह रोहित को शालिनी से खूब डाँट पड़ रही थी.

“ये क्या नॉनसेन्स है रोहित. तुम क्या किसी के भी घर में घुस कर उसे थाने उठा लाओगे. इन्ही बातों से पोलीस की छवि खराब होती है.”

“मेडम मुझे शक था कि गौरव ही साइको है. इसलिए उसके घर गया था पूछताछ करने.मगर उसने फाइयर किया मेरे उपर. और मेडम उसने दो लड़कियों का खून करके उनकी डेड बॉडीस कही गायब कर दी हैं. और सस्पेक्ट तो वो था ही पहले से. ब्लॅक स्कॉर्पियो में जो घूमता है वो.”

“वो सब ठीक है, मगर क़ानून नाम की भी कोई चीज़ होती है. हमें लॉ आंड प्रोसीजर को ध्यान में रखते हुए ही अपनी ड्यूटी करनी है.”

“फिर तो 1000 साल वेट कीजिएगा मेडम. फिर भी शायद ही हाथ आए वो साइको.”

“शट उप. मैं कुछ नही सुन-ना चाहती.”

“सॉरी मेडम.”

“यू कॅन गो नाउ.” शालिनी ने कहा.

रोहित मूह लटका कर बाहर आ गया. “अब मेडम को कैसे सम्झाउ कि क्रिमिनल्स को पकड़ने के लिए उनके ही तरीके आज-माने पड़ते हैं.”

रोहित जंगल में साइको की अंडरग्राउंड कन्स्ट्रक्षन की इंक्वाइरी पे निकल दिया. मगर उसे कोई जानकारी नही मिली. वो एस्टेट ऑफीस गया, ड्म ऑफीस गया मगर कोई सुराग नही मिला उस कन्स्ट्रक्षन के बारे में.

“अजीब बात है, जंगल में अंडरग्राउंड कन्स्ट्रक्षन किसने की, कब की, कही भी कोई रेकॉर्ड नही है इसका. साइको ने बहुत सोच समझ कर अपना ठिकाना बनाया था. अगर मान लिया जाए कि गौरव मेहरा ही साइको है तो मुझे उसके आस पास के लोगो से ही इंक्वाइरी करनी चाहिए. सबसे पहले उसकी बीवी से मिलता हूँ. मोहित से उसका नंबर लेता हूँ.”

रोहित मोहित से दीपिका का नंबर ले कर उसे फोन करता है. वो मिलने के लिए तैयार हो जाती है.

“कल मैं मोहित के ऑफीस जा रही हूँ. सुबह 11 बजे आप वही मिल सकते हैं मुझे” दीपिका ने कहा.”

“ओके थॅंक यू दीपिका जी.” रोहित ने कहा.

“गौरव मेहरा पर पूरी तरह फोकस करने से पहले, ब्लॅक स्कॉर्पियो के बाकी 2 ओनर्स की भी जाँच पड़ताल कर लूँ. दीपिका से कल ही मुलाक़ात होगी, तब तक ये काम निपटा लेता हूँ. केस इतना पेचीदा है कि जल्दबाज़ी में गौरव मेहरा को साइको मान-ना भूल होगी. हालाँकि सबसे बड़ा सस्पेक्ट अभी वही है.”

रोहित पहले देवेंदर सिंग (आर्मी कर्नल) के घर पहुँचता है. उसके घर के बाहर ही एक ब्लॅक स्कॉर्पियो खड़ी थी. रोहित उसे बड़े गौर से देखता है.

“ह्म्म…कही इसी कार में तो नही घूमते हो तुम मिस्टर साइको” रोहित ने मन ही मन सोचा.

रोहित कार को अच्छी तरह से देखने के बाद घर के दरवाजे की तरफ बढ़ा. उसने डोर बेल बजाई तो एक बुजुर्ग ने दरवाजा खोला.

“क्या मैं कर्नल देवेंदर सिंग से मिल सकता हूँ.” रोहित ने कहा.

“साहब तो मुंबई गये हुए हैं.”

“कब तक लौटेंगे वो.”

“कुछ कह नही सकता, उनका आने जाने का कोई टाइम फिक्स नही होता.”

“ह्म्म आप कौन हैं.”

“मैं इस घर का नौकर हूँ.”

“क्या एक गिलास पानी मिलेगा काका.”

“हां हां बिल्कुल आओ अंदर आओ…मैं अभी लाता हूँ पानी.”

रोहित अंदर आया तो उसने देवार पर एक पैंटिंग लगी देखी. पैंटिंग बहुत ही अजीब थी. उसमें एक घोड़े की पीठ पर आदमी का कटा हुआ सर रखा था. आस पास घाना जंगल था.

“ये कैसी अजीब सी पैटिंग है. ऐसी पैटिंग किसने बनाई. और कर्नल ने इसे अपने ड्रॉयिंग रूम में लगा रखा है. कुछ बहुत ही अजीब सा महसूस हो रहा है इस पैंटिंग को देख कर.”

“ये लीजिए पानी”

रोहित ने पानी पिया और बोला, “ये कैसी अजीब सी पैंटिंग है काका.”

“पता नही कहा से ले आए साहिब इसे. हो सकता है कि उन्होने खुद बनाई हो. मुझे भी ये यहाँ तंगी अजीब सी लगती है.”

“क्या वो पैटिंग का शॉंक रखते हैं.”

“हां पैंटिंग बनाते भी हैं और खरीद खरीद कर इकट्ठा भी करते रहते हैं. पर इस पैंटिंग का मुझे नही पता कि उन्होने ये खरीदी है या खुद बनाई है.”

“क्या ऐसी अजीब सी पैटिंग और भी हैं या फिर ये एक ही है.”

“ऐसी अजीब पैंटिंग और तो कोई नही देखी मैने.”

“ह्म्म…वैसे कैसा स्वाभाव है आपके साहिब का”

“अच्छा स्वाभाव है. सभी से बहुतब शालीनता से पेश आते हैं.”

“अच्छा काका…मैं बाद में मिलूँगा उनसे. फिर किसी दिन आउन्गा.”

रोहित निकल आया वहाँ से बाहर.

“साइको खुद को आर्टिस्ट बोलता है. कर्नल पैटिंग का शॉंक रखते हैं. बहुत ही अजीबो ग़रीब पैटिंग टाँग रखी है उन्होने घर में. क्या कर्नल को सस्पेक्ट माना जा सकता है. काका के अनुसार उनका स्वाभाव अच्छा है. क्या साइको ऐसा व्यक्ति हो सकता है जिसकी समाज में इज़्ज़त हो. मेरे ख्याल से बिल्कुल हो सकता है. अगर ऐसा ना होता तो वो अब नकाब लगा कर नही घूमता. विजय चिल्ला चिल्ला कर खुद को साइको बता रहा था. मगर वो सिर्फ़ कॉपी कॅट था. गौरव मेहरा भी खुद को साइको साबित करने पे तुला हुआ है. साइको जैसा शातिर दिमाग़ ऐसा कभी नही करेगा. फिर भी अभी किसी नतीज़े पर नही पहुँच सकते. गौरव के साथ साथ अब कर्नल पर भी कड़ी नज़र रखनी होगी मुझे. फिलहाल सिमरन से भी मिल आता हूँ. उसके पास भी तो ब्लॅक स्कॉर्पियो है.” रोहित ने मन ही मन सोचा.

क्रमशः........................

......

BAAT EK RAAT KI--82

gataank se aage.................

Gaurav ko dekhte hi dipika uske paas aayi aur boli, “sab thik to hai na.”

“naatak band kar aur jaldi se bedroom mein aaja.” Gaurav ne kaha.

Gaurav sweta ka haath pakad kar bedroom ki taraf chal diya. Dipika hairaani mein dekhti rahi. Sweta aur dipika ki nazre takraayi. Dipika samajh gayi ki gaurav use jabardasti laaya hai vahan. Dipika bhi gaurav ke piche piche bedroom mein aa gayi.

“aap kya karna chaahte hain.” Dipika ne pucha.

“chupchaap sofe par baith jaa aur kuch sikh sweta se. bahut atche se deti hai chut ye. Tu bhi kuch sikh le.”

Sweta chupchaap khadi thi.

“sweta soch kya rahi hai. chal nikaal mera lund baahar aur choosna shurun kar. Meri biwi ko sucking nahi aati. Sikha de ise ki sucking kaise ki jaati hai.” gaurav ne kaha.

“sir inke saamne main kaise……” sweta gidgidaayi.

Dipika vahan se jaane lagi to gaurav ne use daboch liya aur bola, “sweta ki chudaayi dekhe bina tu kahi nahi jaayegi. ”

Gaurav ne dipika ko jabardasti vahi bitha diya, “agar tu yahan se hili to tujhe goli maar dunga main.”

Gaurav ne sweta ko awaaj di, “idhar aa saali. Yahi iski nazro ke bilkul saamne suck kar.”

Sweta nazre jhuka kar chupchaap gaurav ke paas aa gayi.

“jaldi se lund nikaal mera baahar aur dikha ise ki lund kaise choosa jaata hai.” gaurav ne kaha.

Sweta chupchaap gaurav ke saamne baith gayi aur uski pant ki zip khol kar gaurav ke ling ko baahar nikaal liya.

“good ab apne style se ise choosna shuru karo.” Gaurav ne kaha.

Sweta ne muh khol kar gaurav ke lund ko muh mein ghusaa liya aur dhire dhire choosne lagi.

“dipika dekho kis tarah se choos rahi hai ye. Is tarah se choosna chaahiye tumhe lund ko.” Gaurav ne kaha.

Gaurav ne sweta ke baal pakad liye aur uske muh mein dhakke maarne laga. Sweta ki haalat patli ho gayi.

Kuch der tak gaurav yu hi uske muh mein dhakke maarta raha. Dipika ne to apni aankhe band kar li thi.

Achaanak gaurav ne apne ling ko sweta ke muh se nikaal liya aur bola, “chal ab dipika ke ghutno par haath rakh kar jhuk ja. Meri biwi tujhe support degi aur main piche se teri chut maarunga…hahaha.”

Dipika aur sweta ki nazre takraayi. Bahut se swaal the dono ki aankho mein. Jinka jawaab dono mein se kisi ke paas nahi tha.

Gaurav ne sweta ki salwar ka naada khol kar use apne aage jhuka diya. Sweta ko na chaahte hue bhi dipika ke ghutno par haath rakhna pada. Ek jhatke mein lund daal diya gaurav ne sweta ki chut mein.

“aaahhhh….sir madam ke saamne main enjoy nahi kar paaungi.” Sweta ne karaahte hue kaha.

“ye chudaayi tere liye nahi balki madam ko dikhane ke liye hi hai…hahahaha.”

Gaurav ne jor jor se dhakke maarne shuru kar diya sweta ke ander. Shiskiyan gunjne lagi bedroom mein sweta ki. Gaurav ke tej tej dhakko ke kaaran sweta ke haath baar baar dipika ke ghutno se hat jaate the. Magar vo baar baar vaapis ghutno par haath rakh deti thi. dipika aankhe band kiye baithi thi.

“dipika aankhe band kyon kar rakhi hai. dekh kaise chudva rahi hai ye randi…tujhe bhi asie hi chudvaana chaahiye. Hahahaha”

Sweta ki shiskiyan aur tej hoti ja rahi thi. vo apne charam ke nazdik thi.

“sir…aaaahhhhhh please ruk jaao….aaahhh.”

“very good sweta. Dipika ko samjhaao ye sab. Kitna maja kar rahi ho tum. Itna maja ye kyon nahi kar sakti.”

Gaurav bhi jhad gaya sweta ke ander. Usne fauran sweta ki chut se lund nikaal liya aur use jor se dhakka diya ek taraf, “chal dafa ho ja yahan se randi kahi ki. Tujhe sharam nahi aati husband wife ke bich aakar apni chut marvaate hue. Ja jaha jaana hai tujhe. Delhi ja rahi thi na tu. Ja jaakar delhi mein gaanD marva apni. Saali randi.”

Sweta ne apne kapde thik kiye aur chupchaap vahan se nikal gayi.

“son of a bitch…” sweta ne ghar se nikalte hue kaha.

……………………………………………………………………….

Rohit apne cabin mein hi baitha tha. bholu ander aaya to usne pucha, “kuch pata chala kya?”

“haan sir 2006 mein ek fir darj huyi thi gaurav mehra ke khilaaf. Ek shopkiper ne complaint ki thi ki gaurav mehra ne uske bhai ko uske hi saamne cricket bet se itna maara ki vo mar gaya. baat sirf itni thi ki vo kah raha tha ki india jitega aur gaurav mehra bet laga raha tha ki pakistan jitega. Un dino koyi series chal rahi thi.”

“koyi hairaani nahi huyi mujhe. Jaisa uska behaviour hai vo kuch bhi kar sakta hai.”

“par sir baad mein us case ka kuch nahi bana. Gaurav mehra ke khilaaf koyi thos sabut nahi mile. Aur haan sir us vakt sub inspector vijay jyada hi interest le rahe the is case mein.”

“kya vijay jaanta tha gaurav ko?”

“shaayad. Mujhe ab yaad aa raha hai ki vijay sir ne gaurav ke liye us vakt ke ASP se kaafi request ki thi. shaayad ASP saahib ko moti rakam bhi di gayi thi case ko rafa dafa karne ke liye.

“us vakt to chauhan bhi tha na yahan.”

“ji haan vo bhi the. Vahi to case ko handle kar rahe the.”

“tumhe kya lagta hai, kya chauhan bhi gaurav aur vijay ke saath mila hua tha us vakt.” Rohit ne bholi se pucha.

“mujhe nahi lagta sir ki vo mile hue the. Kyonki agar aisa hota to unhe ASP saahib ki sifaaris lagaane ki jaroorat na padti. Haan shaayad un par dabaav banaaya gaya aur dabaav mein aakar unhone koyi action nahi liya.” Bholu ne kaha.

“hmm…thik hai tum jaao” rohit ne kaha.

Bholu ke jaane ke baad rohit gahri soch mein dub gaya.

Agli subah rohit ko shalini se khub daant pad rahi thi.

“ye kya nonsense hai rohit. Tum kya kisi ke bhi ghar mein ghus kar use thaane utha laaoge. Inhi baaton se police ki chavi kharaab hoti hai.”

“madam mujhe shak tha ki gaurav hi psycho hai. isliye uske ghar gaya tha puchtaach karne.magar usne fire kiya mere upar. Aur madam usne do ladkiyon ka khun karke unki dead bodies kahi gaayab kar di hain. Aur suspect to vo tha hi pahle se. black scorpio mein jo ghumta hai vo.”

“vo sab thik hai, magar kaanun naam ki bhi koyi chiz hoti hai. hamein law and procedure ko dhyaan mein rakhte hue hi apni duty karni hai.”

“phir to 1000 saal wait kijiyega madam. Phir bhi shaayad hi haath aaye vo psycho.”

“shut up. Main kuch nahi sun-na chaahti.”

“sorry madam.”

“you can go now.” Shalini ne kaha.

Rohit muh latka kar baahar aa gaya. “ab madam ko kaise samjhaaun ki criminals ko pakadne ke liye unke hi tarike aaj-maane padte hain.”

rohit jungle mein psycho ki underground construction ki inquiry pe nikal diya. Magar use koyi jaankaari nahi mili. Vo estate office gaya, DM office gaya magar koyi suraag nahi mila us construction ke baare mein.

“ajib baat hai, jungle mein underground construction kisne ki, kab ki, kahi bhi koyi record nahi hai iska. Psycho ne bahut soch samajh kar apna thikana banaaya tha. agar maan liya jaaye ki gaurav mehra hi psycho hai to mujhe uske aas paas ke logo se hi inquiry karni chaahiye. Sabse pahle uski biwi se milta hun. mohit se uska number leta hun.”

Rohit mohit se dipika ka number le kar use phone karta hai. vo milne ke liye taiyaar ho jaati hai.

“kal main mohit ke office ja rahi hun. subah 11 baje aap vahi mil sakte hain mujhe” dipika ne kaha.”

“ok thankyou dipika ji.” Rohit ne kaha.

“gaurav mehra par puri tarah focus karne se pahle, black scorpio ke baaki 2 owners ki bhi jaanch padtal kar lun. dipika se kal hi mulaqaat hogi, tab tak ye kaam nipta leta hun. case inta pechida hai ki jaldbaaji mein gaurav mehra ko psycho maan-na bhul hogi. Halaanki sabse bada suspect abhi vahi hai.”

Rohit pahle devender singh (army colonel) ke ghar pahunchta hai. uske ghar ke baahar hi ek black scorpio khadi thi. rohit use bade gaur se dekhta hai.

“hmm…kahi isi car mein to nahi ghumte ho tum mr psycho” rohit ne man hi man socha.

Rohit car ko atchi tarah se dekhne ke baad ghar ke darvaaje ki taraf badha. Usne door bell bajaayi to ek bujurg ne darvaaja khola.

“kya main colonel devender singh se mil sakta hun.” rohit ne kaha.

“saahab to mumbai gaye hue hain.”

“kab tak lautenge vo.”

“kuch kah nahi sakta, unka aane jaane ka koyi time fix nahi hota.”

“hmm aap kaun hain.”

“main is ghar ka naukar hun.”

“kya ek gilaas pani milega kaka.”

“haan haan bilkul aao ander aao…main abhi laata hun pani.”

Rohit ander aaya to usne dewaar par ek painting lagi dekhi. Painting bahut hi ajib thi. usmein ek ghode ki pith par aadmi ka kata hua sar rakha tha. aas paas ghana jungle tha.

“ye kaisi ajib si paiting hai. aisi paiting kisne banaayi. Aur colonel ne ise apne drawing room mein laga rakha hai. kuch bahut hi ajib sa mahsus ho raha hai is painting ko dekh kar.”

“ye lijiye pani”

Rohit ne pani piya aur bola, “ye kaisi ajib si painting hai kaka.”

“pata nahi kaha se le aaye saahib ise. Ho sakta hai ki unhone khud banaayi ho. Mujhe bhi ye yahan tangi ajib si lagti hai.”

“kya vo paiting ka shonk rakhte hain.”

“haan painting banaate bhi hain aur kharid kharid kar ikkatha bhi karte rahte hain. Par is painting ka mujhe nahi pata ki unhone ye kharidi hai ya khud banaayi hai.”

“kya aisi ajib si paiting aur bhi hain ya phir ye ek hi hai.”

“aisi ajib painting aur to koyi nahi dekhi maine.”

“hmm…vaise kaisa swabhaav hai aapke saahib ka”

“atcha swabhaav hai. sabhi se bahutb shaalinta se pesh aate hain.”

“atcha kaka…main baad mein milunga unse. Phir kisi din aaunga.”

Rohit nikal aaya vahan se baahar.

“psycho khud ko artist bolta hai. colonel paiting ka shonk rakhte hain. Bahut hi ajibo garib paiting taang rakhi hai unhone ghar mein. Kya colonel ko suspect maana ja sakta hai. kaka ke anusaar unka swabhaav atcha hai. kya psycho aisa vyakti ho sakta hai jiski samaaj mein ijjat ho. Mere khyaal se bilkul ho sakta hai. agar aisa na hota to vo ab nakaab laga kar nahi ghumta. Vijay chilla chilla kar khud ko psycho bata raha tha. magar vo sirf copy cat tha. gaurav mehra bhi khud ko psycho saabit karne pe tula hua hai. psycho jaisa shaatir dimag aisa kabhi nahi karega. Phir bhi abhi kisi natize par nahi pahunch sakte. Gaurav ke saath saath ab colonel par bhi kadi nazar rakhni hogi mujhe. Philhaal simran se bhi mil aata hun. uske paas bhi to black scorpio hai.” rohit ne man hi man socha.

Kramashah..............................


rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 12 Dec 2014 04:40

raj sharma stories

बात एक रात की--83

गतान्क से आगे.................

रोहित अपनी जीप में बैठा और सिमरन के घर की तरफ चल दिया. घर जा कर पता चला कि वो बॅंक में है. इcइcइ में ब्रांच मॅनेजर थी वो. रोहित इcइcइ बॅंक पहुँच गया.

जब वो सिमरन के ऑफीस में घुसा तो बोला, “अरे तुम”

“व्हाट आ प्लेज़ेंट सर्प्राइज़. आओ-आओ बैठो” सिमरन ने कहा.

सिमरन और रोहित एक दूसरे को जानते थे. देल्ही में एक मॅरेज रिसेप्षन के दौरान मुलाक़ात हुई थी उन दोनो की. रोहित ने उस दिन थोड़ा-थोड़ा फ्लर्ट भी किया था उस दिन सिमरन से… …. फँस ही गयी थी सिमरन जाल में मगर पता नही कहाँ से उसका भाई आ गया अच्छानक और सारा मामला बिगड़ गया …

“मुझे नही पता था कि आप देहरादून में हो.”

“8 महीने पहले ही आई हूँ यहाँ. आप क्या पोलीस में हैं.”

“जी हां ये वर्दी किसी नाटक में भाग लेने के लिए नही पहनी मैने ……”

“अरे हां याद आया आपने बताया था कि आप पोलीस में हैं. कहिए कैसे आना हुआ यहाँ.”

“चलिए पहले काम की बात करते हैं. बाकी बाते तो अब होती ही रहेंगी …”

“बाकी बाते मतलब … …”

“वो सब बाद में. पहले ये बतायें कि क्या आपके पास ब्लॅक स्कॉर्पियो है.”

“हां है…क्यों?”

“आपको पता ही होगा कि शहर में साइको का आतंक है.”

“हां बिल्कुल पता है. मैं खुद शाम ढलते के बाद कभी घर से बाहर नही जाती. ऑफीस से घर भी जल्दी चली जाती हूँ. पर इस सबका मेरी ब्लॅक स्कॉर्पियो से क्या लेना देना.”

“दरअसल साइको ब्लॅक स्कॉर्पियो में ही घूमता है.”

“तो क्या मैं तुम्हें साइको नज़र आती हूँ …”

“अरे नही सिमरन, कैसी बात करती हो. मुझे पता लगा था कि एक ब्लॅक स्कॉर्पियो आप के पास भी है. मुझे नही पता था कि आप वही ब्यूटिफुल सिमरन हैं जिन्हे मैं देल्ही में मिला था.”

“अच्छा.”

“जी हां…आइ मिस्ड यू आ लॉट. आपने अपना नंबर भी नही दिया था वरना आप से बात चीत होती रहती”

“अच्छा नंबर दे कर क्या मैं आपके फ्लर्ट को बढ़ावा देती.”

“फूल भंवरे को बढ़ावा नही देगा तो कैसे चलेगा. हम तो आपके दीवाने हो गये थे आपको देखते ही.”

“हम बाद में मिलें. अभी मैं थोड़ा बिज़ी हूँ. लिख लो मेरा नंबर अब.”

“लिखने की ज़रूरत नही है, आप बोल दीजिए नंबर…दिल की गहराई में उतर जाएगा वो.”

“अच्छा.” सिमरन शर्मा गयी ये सुन कर.

“आप बिल्कुल नही बदली. आज भी वैसे ही शर्मा रही हैं.”

“प्लीज़…ऐसी बातें ना करें अभी. बॅंक के काम में मन उलझा हुआ है अभी.”

सिमरन ने अपना नंबर बता दिया रोहित को. रोहित ने उसे दिल में छाप लिया

सिमरन से मिलने के बाद रोहित सीधा थाने पहुँचा. वो शालिनी से मिल कर केस को डिसकस करना चाहता था.

“मेडम कुछ नयी बाते सामने आईं हैं, सोचा आप से डिसकस कर लूँ.”

“हां बोलो…क्या बात है?”

“मेडम एक उलझन पैदा हो गयी है. मैं आज कर्नल देवेंदर सिंग के यहाँ गया था. उनके ड्रॉयिंग रूम में एक बहूत ही अजीब पैंटिंग देखी मैने.” रोहित ने डीटेल में पूरी बात बताई.

“ह्म्म…एक और ओनर था ना ब्लॅक स्कॉर्पियो का, क्या नाम था उसका ..”

“हां मेडम सिमरन नाम है उसका, उस से भी मिल आया हूँ मैं. उस पर शक का कोई कारण नही है. वैसे भी हमारा सस्पेक्ट एक मेल है और सिमरन फीमेल है. और मैं उसे जानता भी हूँ.”

“ह्म्म…तुम गौरव और देवेंदर दोनो पर कड़ी नज़र रखो…साइको इन दोनो में से ही एक होना चाहिए.”

“जी मेडम”

रोहित जैसे ही शालिनी के कमरे से बाहर निकला उसे चौहान दिखाई दिया. रोहित को देखते ही वो आग बाबूला हो गया, “साले कब से ढूँढ रहा हूँ तुझे मैं. आज तेरी खैर नही.”

चौहान आग बरसाता हुआ रोहित की तरफ बढ़ा. रोहित के कुछ समझ नही आया कि वो अब क्या करे. भागने का रास्ता भी नही था . शूकर है तभी एएसपी साहिबा बाहर आ गयीं.

“रोहित तुम मेरे साथ चलो, एसपी साहिब ने बुलाया है. वैसे मैं अकेली ही जा रही थी मगर अभी-अभी वहाँ से फोन आया है कि एसपी साहिब तुमसे भी मिलना चाहते हैं.”

रोहित ने शालिनी के आने से राहत की साँस ली. वो चौहान के कहर से बच गया था.

“जाओ बेटा आज तुम्हारी खैर नही. खूब खाल उधेड़ेंगे आज एसपी साहिब तुम्हारी.” चौहान ने धीरे से रोहित को कहा.

रोहित ने चौहान को कुछ भी कहना ठीक नही समझा. वो चुपचाप शालिनी के साथ चल दिया.

जैसी की उम्मीद थी शालिनी और रोहित को खूब डाँट पड़ी.

“जंगल में अंडरगाउंड कन्स्ट्रक्षन बहुत बड़ा शुराग है पर तुम दोनो कुछ नही कर पा रहे. अरे पता करो उसके बारे में. ऐसे ही चलता रहा तो मेरी नौकरी चली जाएगी. रोज डाँट मुझे सुन-नी पड़ती है. कितना वक्त और चाहिए तुम्हे इस हराम्खोर साइको को पकड़ने के लिए.”

“सर हमें कुछ इंपॉर्टेंट क्लू मिलें हैं. हमें उम्मीद है कि हम जल्द साइको को पकड़ लेंगे.”

“दट ईज़ गुड न्यूज़. बट आइ निड सम्तिंग इन रियल डियर. जिंदा या मुर्दा चाहिए मुझे वो साइको. अपनी पूरी ताक़त लगा दो. जल्दी से मुझे कुछ रिज़ल्ट दो.”

एसपी साहिब के रूम से निकल कर शालिनी ने कहा, “ गौरव और देवेंदर पर 24 घंटे निगरानी रखो. हमें कुछ ना कुछ हाथ ज़रूर लगेगा.”

“जी मेडम आप चिंता ना करें. आइ विल टेक केर ऑफ एवेरितिंग.”

एएसपी साहिबा अपनी जीप में बैठ कर अपने घर चली गयी. रोहित ने गौरव और कर्नल देवेंदर सिंग की निगरानी के लिए 2-2 कॉन्स्टेबल्स लगा दिए और उनके हिदायत दे दी कि पल-पल की खबर वो उसे देते रहें.

रोहित शहर के राउंड पर निकल पड़ा. काफ़ी देर तक वो यहाँ वहाँ घूमता रहा. अचानक उसे रीमा का ख्याल आया. उसने अपना मोबाइल निकाला जेब से और रीमा का नंबर डाइयल किया. मगर डाइयल करते ही तुरंत काट दिया, “उफ्फ फोन तो उस कामीने चौहान के पास. लगता है रीमा पर पाबंदियाँ लगा दी हैं चौहान ने. लगता है ये अफेर यही ख़तम हो गया है. अचानक ही हम मिले और अचानक ही बिछड़ गये. टेक केर रीमा. हम चाहे मिले ना मिले पर हमारी दोस्ती बनी रहेगी.”

अचानक रोहित को सिमरन का ख़याल आया. “अरे सिमरन को फोन करता हूँ. उसके साथ भी तो कुछ संभावनायें हैं ..”

रोहित ने सिमरन को फोन मिलाया.

“हाई सिमरन…सो गयी क्या?”

“हू ईज़ तीस?”

“अरे मैं रोहित बोल रहा हूँ.”

“ओह तुम. सॉरी तुम्हारा नंबर नही था ना मोबाइल में इसलिए तुम्हे पहचान नही पाई.”

“कोई बात नही सिमरन जी. अब तो पहचान लिया ना. कहा हैं आप इस वक्त.”

“मैं अपने घर पर हूँ.”

“अकेली हैं क्या …”

“क्यों .. …”सिमरन ने पूछा.

“अगर आप अकेली हैं तो हम आपके पास आ जाते हैं आपका मन बहलाने के लिए.”

“अच्छा…”

“जी हां…बोलिए क्या कहती हैं आप. बड़े दिनो बाद मिलें हैं हम आज. क्यों ना आज के दिन को यादगार बना दे हम.”

“यादगार कैसे बनाएँगे वो भी बता दीजिए.”

“आप मिलिए तो सही…हमारी मुलाक़ात खुद-ब-खुद यादगार बन जाएगी.”

सिमरन मुस्कुरा कर बोली, “आप कहाँ हैं इस वक्त?”

“मैं शहर का राउंड ले रहा हूँ. आप कहेंगी तो तुरंत आपके पास आ जाउन्गा.”

“क्यों आ जाएँगे, साइको को नही पकड़ना क्या आपको.”

“पकड़ना है बिल्कुल पकड़ना है. दिन रात इसी चक्कर में रहता हूँ. आज रात आपको पकड़ लेता हूँ, साइको को बाद में देख लूँगा.”

“ह्म्म…मुझे पकड़ कर क्या कीजिएगा. जैल में तो नही डाल देंगे कही.”

“हाहाहा, जैल में नही आपको पकड़ कर अपने दिल में डालने का इरादा है. आ जाउ क्या आपको अपने दिल में डालने के लिए.”

“ह्म्म आ जाओ…”

“अपना अड्रेस दे दीजिए. मैं अभी तुरंत आ जाउन्गा आपके पास.”

सिमरन ने अपना अड्रेस दे दिया रोहित को. रोहित बिना वक्त गवाए कोई 20 मिनिट में पहुँच गया सिमरन के घर.

रोहित ने सिमरन के घर पहुँच कर गौर किया की उसके घर के बाहर ब्लॅक स्कॉर्पियो नही है. “हो सकता है कि उसने गॅरेज में खड़ी की हो स्कॉर्पियो.”

रोहित ने कन्फ्यूज़्ड माइंड से सिमरन के घर की बेल बजाई. सिमरन ने दरवाजा खोला.

“हाई सिमरन…एक बात बताओ, तुम्हारी ब्लॅक स्कॉर्पियो कहाँ खड़ी करती हो तुम.”

“छ्चोड़ो भी…यहाँ इन्वेस्टिगेशन करने आए हो या फिर…..”

“पोलीस वाला हूँ ना कोई ना कोई सवाल घूमता रहता है दिमाग़ में. बताओ ना, कहा खड़ी करती हो अपनी कार तुम.”

“हद करते हो. आते ही सवाल जवाब शुरू. पहले अंदर तो आओ.”

ना जाने क्यों रोहित का माथा कुछ ठनक रहा था. “बड़ी जल्दी मान गयी वैसे सिमरन. इतनी जल्दी मुझे घर इन्वाइट कर लेगी, सोचा नही था मैने. अपनी स्कॉर्पियो के बारे में भी कुछ नही बता रही. कही कुछ गड़बड़ तो नही.”

“आओ ना रोहित सोच क्या रहे हो?”

“नही कुछ नही…अच्छा लगा मुझे जो कि आपने मुझे इन्वाइट किया अपने घर.”

“फिर झीजक क्यों रहे हैं. आइए ना.” सिमरन ने कहा.

सिमरन रोहित को अंदर इन्वाइट कर रही थी मगर, रोहित के मान में काई सवाल घूम रहे थे. वो सोच रहा था कि आख़िर सिमरन साफ-साफ ये क्यों नही बता रही कि उसकी ब्लॅक स्कॉर्पियो कहाँ हैं. क्योंकि हर सवाल का जवाब उसे सिमरन से ही मिलना था इसलिए वो मुस्कुराता हुआ सिमरन के घर में घुस गया.

“क्या लेंगे आप चाय या कॉफफी या कुछ ठंडा.”

“फिलहाल हो सके तो अंगूर खिला दीजिए. आपके टॉप से बाहर निकले जा रहे हैं ये. क्या कीजिएगा इन्हे संभाल कर, दे दीजिए हमें हम संभाल लेंगे इन्हे.”

“बहुत बेशरम हैं आप…ऐसा कहता है क्या कोई. …”

“अब आप पूछ रही थी कि क्या लूँगा तो अपनी चाय्स बता दी.”

“घर में घुसते ही क्या आपको बस अंगूर नज़र आए.” सिमरन ने पूछा.

क्रमशः........................

......

BAAT EK RAAT KI--83

gataank se aage.................

Rohit apni jip mein baitha aur simran ke ghar ki taraf chal diya. Ghar ja kar pata chala ki vo bank mein hai. icici mein branch manager thi vo. Rohit icici bank pahunch gaya.

Jab vo simran ke office mein ghusa to bola, “arey tum”

“what a pleasant surprise. Aao-aao baitho” simran ne kaha.

Simran aur rohit ek dusre ko jaante the. Delhi mein ek marriage reception ke dauran mulaqaat huyi thi un dono ki. Rohit ne us din thoda-thoda flirt bhi kiya tha us din simran se… …. phans hi gayi thi simran jaal mein magar pata nahi kaha se uska bhai aa gaya achchaanak aur saara maamla bigad gaya …

“mujhe nahi pata tha ki aap dehradun mein ho.”

“8 mahine pahle hi aayi hun yahan. Aap kya police mein hain.”

“ji haan ye vardi kisi naatak mein bhaag lene ke liye nahi pahni maine ……”

“arey haan yaad aaya aapne bataaya tha ki aap police mein hain. Kahiye kaise aana hua yahan.”

“chaliye pahle kaam ki baat karte hain. Baaki baate to ab hoti hi rahengi …”

“Baaki baate matlab … …”

“vo sab baad mein. Pahle ye bataayein ki kya aapke paas black scorpio hai.”

“haan hai…kyon?”

“aapko pata hi hoga ki shahar mein psycho ka aatank hai.”

“haan bilkul pata hai. main khud shaam dhalte ke baad kabhi ghar se baahar nahi jaati. Office se ghar bhi jaldi chali jaati hun. par is sabka meri black scorpio se kya lena dena.”

“darasal psycho black scorpio mein hi ghumta hai.”

“to kya main tumhen psycho nazar aati hun …”

“arey nahi simran, kaisi baat karti ho. Mujhe pata laga tha ki ek black scorpio aap ke paas bhi hai. mujhe nahi pata tha ki aap vahi beautiful simran hain jinhe main delhi mein mila tha.”

“atcha.”

“ji haan…I missed you a lot. Aapne apna number bhi nahi diya tha varna aap se baat chit hoti rahti”

“atcha number de kar kya main aapke flirt ko badhaava deti.”

“phool bhanvre ko badhaava nahi dega to kaise chalega. Hum to aapke dewane ho gaye the aapko dekhte hi.”

“hum baad mein milein. Abhi main thoda busy hun. likh lo mera number ab.”

“likhne ki jaroorat nahi hai, aap bol dijiye number…dil ki gahraayi mein utar jaayega vo.”

“atcha.” Simaran sharma gayi ye sun kar.

“aap bilkul nahi badli. Aaj bhi vaise hi sharma rahi hain.”

“please…aisi baatein na karein abhi. Bank ke kaam mein man uljha hua hai abhi.”

Simran ne apna number bata diya rohit ko. Rohit ne use dil mein chaap liya

Simran se milne ke baad rohit sidha thaane pahuncha. Vo shalini se mil kar case ko discuss karna chaahta tha.

“madam kuch nayi baate saamne aayin hain, socha aap se discuss kar lun.”

“haan bolo…kya baat hai?”

“madam ek uljhan paida ho gayi hai. main aaj colonel devender singh ke yahan gaya tha. unke drawing room mein ek bahoot hi ajib painting dekhi maine.” Rohit ne detail mein puri baat bataayi.

“hmm…ek aur owner tha na black scorpio ka, kya naam tha uska ..”

“haan madam simran naam hai uska, us se bhi mil aaya hun main. Us par shak ka koyi kaaran nahi hai. vaise bhi hamaara suspect ek male hai aur simran female hai. aur main use jaanta bhi hun.”

“hmm…tum gaurav aur devender dono par kadi nazar rakho…psycho in dono mein se hi ek hona chaahiye.”

“ji madam”

Rohit jaise hi shalini ke kamre se baahar nikla use chauhan dikhayi diya. Rohit ko dekhte hi vo aag babula ho gaya, “saale kab se dhundh raha hun tujhe main. Aaj teri khair nahi.”

Chauhan aag barsaata hua rohit ki taraf badha. Rohit ke kuch samajh nahi aaya ki vo ab kya kare. Bhaagne ka raasta bhi nahi tha . shukar hai tabhi ASP saahiba baahar aa gayin.

“rohit tum mere saath chalo, SP saahib ne bulaaya hai. vaise main akeli hi ja rahi thi magar abhi-abhi vahan se phone aaya hai ki SP saahib tumse bhi milna chaahte hain.”

Rohit ne shalini ke aane se raahat ki saans li. Vo chauhan ke kahar se bach gaya tha.

“jaao beta aaj tumhaari khair nahi. Khub khaal udhedenge aaj SP saahib tumhaari.” Chauhan ne dhire se rohit ko kaha.

Rohit ne chauhan ko kuch bhi kahna thik nahi samjha. Vo chupchaap shalini ke saath chal diya.

Jaisi ki ummid thi shalini aur rohit ko khub daant padi.

“jungle mein undergound construction bahut bada shuraag hai par tum dono kuch nahi kar pa rahe. Arey pata karo uske baare mein. Aise hi chalta raha to meri naukri chali jaayegi. Roj daant mujhe sun-ni padti hai. kitna vakt aur chaahiye tumhe is haraamkhor psycho ko pakadne ke liye.”

“sir hamein kuch important clue milein hain. Hamein ummid hai ki hum jald psycho ko pakad lenge.”

“that is good news. But I nid something in real dear. Jinda ya murda chaahiye mujhe vo psycho. Apni puri taakat laga do. Jaldi se mujhe kuch result do.”

SP saahib ke room se nikal kar shalini ne kaha, “ gaurav aur devender par 24 ghante nigraani rakho. Hamein kuch na kuch haath jaroor lagega.”

“ji madam aap chinta na karein. I will take care of everything.”

ASP saahiba apni jip mein baith kar apne ghar chali gayi. Rohit ne gaurav aur colonel devender singh ki nigraani ke liye 2-2 constables laga diye aur unke hidaayat de di ki pal-pal ki khabar vo use dete rahein.

Rohit shahar ke round par nikal pada. Kaafi der tak vo yahan vahan ghumta raha. Achaanak use rima ka khyaal aaya. Usne apna mobile nikaala jeb se aur rima ka number dial kiya. Magar dial karte hi turant kaat diya, “uff phone to us kamine chauhan ke paas. Lagta hai rima par paabandiyan laga di hain chauhan ne. lagta hai ye affair yahi khatam ho gaya hai. achaanak hi hum mile aur achaanak hi bichad gaye. Take care rima. Hum chaahe mile na mile par hamaari dosti bani rahegi.”

Achaanak rohit ko simran ka khayaal aaya. “arey simran ko phone karta hun. uske saath bhi to kuch sambhavnaayein hain ..”

Rohit ne simran ko phone milaaya.

“hi simaran…sho gayi kya?”

“who is this?”

“arey main rohit bol raha hun.”

“oh tum. Sorry tumhaara number nahi tha na mobile mein isliye tumhe pahchaan nahi paayi.”

“koyi baat nahi simran ji. Ab to pahchaan liya na. kaha hain aap is vakt.”

“main apne ghar par hun.”

“akeli hain kya …”

“Kyon .. …”simran ne pucha.

“agar aap akeli hain to hum aapke paas aa jaate hain aapka man bahlaane ke liye.”

“atcha…”

“ji haan…boliye kya kahti hain aap. Bade dino baad milein hain hum aaj. Kyon na aaj ke din ko yaadgaar bana de hum.”

“yaadgaar kaise banaayenge vo bhi bata dijiye.”

“aap miliye to sahi…hamaari mulaqaat khud-b-khud yaadgaar ban jaayegi.”

Simran muskura kar boli, “aap kaha hain is vakt?”

“main shahar ka round le raha hun. aap kahengi to turant aapke paas aa jaaunga.”

“kyon aa jaayenge, psycho ko nahi pakadna kya aapko.”

“pakadna hai bilkul pakadna hai. din raat isi chakkar mein rahta hun. aaj raat aapko pakad leta hun, psycho ko baad mein dekh lunga.”

“hmm…mujhe pakad kar kya kijiyega. Jail mein to nahi daal denge kahi.”

“hahaha, jail mein nahi aapko pakad kar apne dil mein daalne ka iraada hai. aa jaaun kya aapko apne dil mein daalne ke liye.”

“hmm aa jaao…”

“apna address de dijiye. Main abhi turant aa jaaunga aapke paas.”

Simran ne apna address de diya rohit ko. Rohit bina vakt gavaaye koyi 20 minute mein pahunch gaya simran ke ghar.

Rohit ne simran ke ghar pahunch kar gaur kiya ki uske ghar ke baahar black scorpio nahi hai. “ho sakta hai ki usne garage mein khadi ki ho scorpio.”

Rohit ne confused mind se simran ke ghar ki bell bajaayi. Simran ne darvaaja khola.

“hi simran…ek baat bataao, tumhaari black scorpio kaha khadi karti ho tum.”

“chhodo bhi…yahan investigation karne aaye ho ya phir…..”

“police wala hun na koyi na koyi sawaal ghumta rahta hai dimag mein. Bataao na, kaha khadi karti ho apni car tum.”

“had karte ho. Aate hi sawaal jawaab shuru. Pahle ander to aao.”

Na jaane kyon rohit ka maatha kuch thanak raha tha. “badi jaldi maan gayi vaise simran. Itni jaldi mujhe ghar invite kar legi, socha nahi tha maine. Apni scorpio ke baare mein bhi kuch nahi bata rahi. Kahi kuch gadbad to nahi.”

“aao na rohit soch kya rahe ho?”

“nahi kuch nahi…atcha laga mujhe jo ki aapne mujhe invite kiya apne ghar.”

“phir jhijak kyon rahe hain. Aaiye na.” simran ne kaha.

Simran rohit ko ander invite kar rahi thi magar, rohit ke man mein kayi sawaal ghum rahe the. Vo soch raha tha ki aakhir simran saaf-saaf ye kyon nahi bata rahi ki uski black scorpio kaha hain. Kyonki har sawaal ka jawaab use simran se hi milna tha isliye vo muskuraata hua simran ke ghar mein ghus gaya.

“kya lenge aap chaaye ya coffi ya kuch thanda.”

“philhaal ho sake to angoor khila dijiye. Aapke top se baahar nikle ja rahe hain ye. Kya kijiyega inhe sambhaal kar, de dijiye hamein hum sambhaal lenge inhe.”

“bahut besharam hain aap…aisa kahta hai kya koyi. …”

“ab aap puch rahi thi ki kya lunga to apni choice bata di.”

“ghar mein ghuste hi kya aapko bas angoor nazar aaye.” Simran ne pucha.

Kramashah..............................


rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 12 Dec 2014 04:41

बात एक रात की--84

गतान्क से आगे.................

“नज़र तो बहुत कुछ आया मगर अंगूर कुछ इस तरह ज़ोर मार रहें हैं आपके टॉप के पीछे से कि देखता ही रह गया. दे आर वेरी शार्प, कही फाड़ ना दें आपके टॉप को.”

“अच्छा.”

“जी हां, वैसे आप बहुत अच्छी लग रही हैं.”

“फ्लर्ट में तो माहिर हैं आप. बैठिए आप मैं चाय लाती हूँ. कुछ तो लेना ही पड़ेगा आपको.”

रोहित ने आगे बढ़ कर सिमरन का हाथ पकड़ लिया और इस से पहले की वो कुछ समझ पाती उसके होंटो को अपने होंटो में जाकड़ लिया.

“उम्म्म्म… छोड़िए.” सिमरन ने कहा.

“चाय क्यों ला रही हैं. मैं बहुत कुछ लेने वाला हूँ आप चिंता ना करें. …”

“वैसे चाय के बाद मैं ज़्यादा एग्ज़ाइटेड फील करती हूँ…सोच लीजिए.”

“उफ्फ अगर ऐसा है तो चाय मुझे भी दीजिए…वैसे चाय में कुछ मिलाती तो नही हैं आप .. …”

“नही बस सिंपल चाय लेती हूँ मैं.”

“कूल, ले आइए चाय, आइ आम वेटिंग.”

रोहित सोफे पर बैठ गया. सिमरन किचन में चली गयी.

कुछ देर बाद सिमरन चाय ले कर आई. एक कप उसने रोहित को दे दिया और एक कप खुद लेकर रोहित के सामने दूसरे सोफे पर बैठ गयी.

रोहित को ना जाने क्यों सिमरन पर कुछ शक हो रहा था. वो सोफे से उठा और बोला, “आइए अपने कप एक्सचेंज कर लेते हैं, इस से प्यार बढ़ता है.”

रोहित को लग रहा था कि अगर उसने उसके कप में कुछ मिलाया होगा तो वो कप एक्सचेंज करने से मना कर देगी. मगर सिमरन ने चुपचाप मुस्कुराते हुए कप एक्सचेंज कर लिए.

“ह्म्म अच्छी चाय बनाई है आपने. देखने वाली बात अब ये है की आप कितनी एग्ज़ाइट होती हैं चाय पे कर. शायद मुझे एग्ज़ाइट्मेंट में एक ब्लो जॉब मिल जाए.”

“हाहाहा…इतनी भी एग्ज़ाइट नही होती हूँ मैं की किसी का डिक मूह में ले लूँ.”

“वैसे इतना एग्ज़ाइट करने के लिए क्या करना होगा मुझे, आइ वॉंट टू प्लेस माइ डिक बेटवीन युवर ब्यूटिफुल लिप्स.” रोहित ने हंसते हुए कहा.

“तुम कुछ नही कर सकते, आइ डॉन’ट लाइक सकिंग. …” सिमरन भी हंसते हुए बोली.

रोहित सिमरन के पास आया और उसे उसका हाथ पकड़ कर सोफे से उठा लिया और बोला, “आपको क्या पसंद है और क्या नही वो सब हम बाद में देखेंगे, मुझे अपने अंगूर दे दीजिए फिलहाल …”

“अंगूर खट्टे हुए तो ?”

“इतनी सुंदर बगिया के अंगूर खट्टे हो ही नही सकते.” रोहित ने कहा और सिमरन के टॉप को उतारने लगा.

“वैसे चख कर देख लेता हूँ अभी ..”

“बड़े उतावले हो रहे हैं आप. रुकिये थोड़ी देर. थोड़ा बात चीत तो कर लें.”

“बात चीत भी होती रहेगी और काम भी होता रहेगा …” रोहित ने कहा और एक झटके में सिमरन का टॉप उतार कर सोफे पर फेंक दिया.

“अरे ये अंगूर तो बिना ब्रा के ही टॉप के पीछे छुपे थे. तभी कहु क्यों टक्कर मार रहे हैं टॉप में. यू हॅव गॉट ब्यूटिफुल बूब्स सिमरन.”

“अच्छा”

“हां, बहुत सुंदर हैं…लेट मी सक देम नाउ.” रोहित ने सिमरन के बायें बूब्स को थाम लिया और उसके निपल्स को चूसने लगा.

“आअहह….इतनी जल्दी सब शुरू हो जाएगा मैने सोचा नही था.”

“आपने मुझे घर बुला लिया अपने तो जल्दी तो मुझे करनी ही थी हहहे.”

“यू आर डर्टी कॉप.”

“आइ नो, बट आइ आम हार्मलेस…”

“आअहह दाँत मार दिए और बोलते हो हार्मलेस …”

“सॉरी…सॉरी…सॉरी हड़बड़ी में गड़बड़ी हो गयी.” रोहित ने हंसते हुए कहा.

“निकालो अपना पेनिस बाहर मैं भी दाँत मारूँगी.”

“विल यू सक इट पर तुम तो लाइक नही करती ना.” रोहित ने कहा.

“सक नही करूँगी बल्कि दाँत मारूँगी…निकालो बाहर.”

“ओके बाइ दा वे माइ डिक लाइक्स अड्वेंचर, देखते हैं कि क्या करोगी तुम.” रोहित ने अपनी ज़िप खोल कर अपने लिंग को बाहर खींच लिया.

“ह्म्म… नाइस डिक…नाउ आइ विल गिव दा सेम ट्रीटमेंट टू युवर डिक विच यू हॅव गिवन टू मी निपल्स. आर यू रेडी.”

“ऑल्वेज़ रेडी फॉर यू, कम ऑन सक इट हार्ड आंड नाइस.” रोहित ने कहा.

सिमरन रोहित के सामने घुटनो के बल बैठ गयी और उसके लिंग को अपने होंटो के बीच दबा लिया.

“आआहह वेरी गुड, प्लीज़ कंटिन्यू….” रोहित ने कहा. मगर अगले ही पल रोहित कराह उठा, “आउच.”

“क्या हुआ रोहित.” सिमरन ने पूछा.

“यार तुमने सच में दाँत मार दिए, ये सच में अड्वेंचर हो गया. अब आपके मूह में लंड रखना ख़तरे से खाली नही…आपकी चूत ही ठीक रहेगी लंड रखने के लिए.”

“ग़लती से लग गये दाँत. सॉरी…मैने इंटेन्षनली नही किया.”

“इट्स ओके…बट आइ कॅन’ट टेक दा रिस्क…प्लीज़ आपकी चूत को सामने लायें और हमें सुखद परवेश परदान करें.”

रोहित ने सिमरन को अपनी गोदी में उठा लिया और बोला, “चलिए आपके बेडरूम में चलते हैं. अगर यही ड्रॉयिंग रूम में ही ठुकवानी है तो वो भी बोल दीजिए.”

“नही मेरा मखमली बिस्तर मुझे अच्छा लगता है. फील फ्री टू टेक मी देर.”

रोहित सिमरन को उसके बेडरूम में ले आया और तुरंत उसके सारे कपड़े उतार दिए. खुद के कपड़े उतार कर वो सिमरन के उपर चढ़ गया और बोला, “पहली बार संभोग में उतर रहे हैं हम दोनो. मेरे लंड को किस पोज़िशन में परवेश देना पसंद करेंगी आप.”

“ह्म्म…आइ ऑल्वेज़ प्रिफर मिशनरी पोज़िशन. रेस्ट अप्ट यू.”

“अब आपको जो पसंद है उसी पोज़िशन में परवेश करेंगे. टांगे खोल कर मेरी कमर पर काश लीजिए आपको एक लंबे सफ़र पे ले जा रहा हूँ मैं ..”

“अच्छा…”

“जी हां बिल्कुल.”

रोहित ने सिमरन की टांगे खोल कर उसकी योनि पर अपना लिंग टिका दिया और ज़्यादा वक्त ना गवाते हुए एक धक्के में अपने लिंग को तकरीबन आधा सिमरन की योनि में सरका दिया. सिमरन कराह उठी, “ऊओह यस…”

“वाउ व्हाट आ स्मूद पुसी यू हॅव. वेरी नाइस. लीजिए अब पूरा जाकड़ लीजिए मेरे लंड को.” रोहित ने खुद को पूरा धकैल दिया सिमरन की योनि में. इस दौरान सिमरन ने बिस्तर की चादर को पूरे ज़ोर से मुथि में भींच रखा था.

“उफ़फ्फ़ आपने जान निकाल दी मेरी.”

“इतनी जल्दी जान निकल गयी, अभी जब आपकी रेल बनेगी तब क्या होगा …”

“रेल बनेगी मतलब… … क्या मतलब है तुम्हारा.”

“कुछ नही घबराए नही मज़ाक कर रहे हैं हम. अब अगर आपकी इज़ाज़त हो तो हम आपकी थुकायी कर लें.”

“कीजिए ना हमने रोका है क्या, वैसे रेल का मतलब क्या था …”

रोहित ने बिना कुछ कहे सिमरन की योनि को अपने लिंग से रगड़ना शुरू कर दिया और बोला, “रेल का मतलब भी पता चल जाएगा, ज़रा धर्य रखें.”

कुछ ही मिंटो में सिमरन की शिसकियाँ गूँज रही थी कमरे में. वो अपने दोनो पाँव पटक रही थी बिस्तर पर.

“उउउहह रोहित प्लीज़ रुकना मत आआहह”

ये सुनते ही रोहित रुक गया और सिमरन की योनि से अपना लिंग निकाल लिया और बोला, “अब एक सवाल है.”

“व्हाट मज़ाक मत करो, जल्दी वापिस डालो, मेरा ऑर्गॅज़म रोक दिया तुमने …” सिमरन ने निराशा भरे शब्दो में कहा.

“डाल दूँगा वापिस पहले विवेक भाई की तरह कुछ सवाल पूछ लूँ …”

“ये क्या मज़ाक है रोहित, प्लीज़ डाल दो ना.” सिमरन गिड़गिडाई.

“पहले ये बताओ कि तुम्हारी ब्लॅक स्कॉर्पियो कहाँ है.”

“यार तुम यहाँ अपनी इन्वेस्टिगेशन पे आए हो या फिर मुझसे मिलने ….”

“ड्यूटी सबसे पहले है, बाकी काम बाद में. आपने भी तो आज दिन में मुझे अपने ऑफीस से चले जाने को बोल दिया था. मुझे अपने सवालो के जवाब चाहिए, अगर जवाब नही मिलेगा तो आपकी चूत प्यासी रह जाएगी.”

“ये तो हद हो गयी. किसी ने मेरे साथ ऐसा नही किया.”

“बताओ ना मुझे कि कहाँ है तुम्हारी कार. क्यों झीजक रही हो. जल्दी से बताओ, आइ विल फक यू ईवन हार्डर आफ्टर दट.”

“कार मेरे बॉय फ्रेंड के पास है. वो देल्ही ले गया है ड्राइव करके. कल शाम तक लौट आएगा. तुम्हे अपने बॉय फ्रेंड के बारे में बताना नही चाहती थी इसलिए झीजक रही थी.”

“ह्म्म… क्या नाम है तुम्हारे बॉय फ्रेंड का.”

“उस से तुम्हे क्या मतलब? तुम मुझसे मतलब रखो.”

“मतलब है मुझे. शहर में साइको ने आतंक मचा रखा है और वो ब्लॅक स्कॉर्पियो लेकर घूमता है. क्या अक्सर तुम्हारी कार तुम्हारे बॉय फ्रेंड के पास होती है.”

“हां होती तो है…तुम्हे क्या लेना देना, हटो मेरे उपर से आइ डॉन’ट वॉंट युवर डिक अनीमोर.”

मगर रोहित ने तुरंत अपने लिंग को सिमरन की योनि में डाल दिया.

“आअहह… अब क्यों डाला तुमने.”

“काफ़ी सवालो के जवाब मिल गये इसलिए. प्लीज़ बताओ ना कि कौन है तुम्हारा बॉय फ्रेंड.”

“संजय नाम है उसका…”

“ह्म्म…लव अफेर चल रहा है क्या तुम्हारा उसके साथ.”

“पागल हो क्या, ही ईज़ मॅरीड ओर अगर लव अफेर चल रहा होता तो तुम अपना ये ब्लॅकमेलिंग डिक डाल कर नही पड़े होते मेरे अंदर. ही ईज़ जस्ट टाइम पास.”

“टाइम पास फ्रेंड…वाह मान गया आपको ….” रोहित हँसने लगा.

“हँसो मत और अब अपना काम करो.”

“बस एक और सवाल.” रोहित ने कहा.

“अब क्या है…लगता है तुम्हारा संभोग का मूड नही है.”

“बस संजय का अड्रेस दे दीजिए मुझे.”

“क्या उसका अड्रेस क्यों दू तुम्हे. तुम उस पर शक मत करो. वो बहुत शरीफ बंदा है.”

“शरीफ बंदे की ही तलाश है मुझे. मुझे लगता है साइको कोई शरीफ बंदा ही है जिस पर कि हमारी नज़र नही गयी अब तक. वैसे ये अंदाज़ा ही है.”

“यार तुम साइको को पाकड़ो जाकर मेरा क्यों मूड खराब कर रहे हो. कब से अंदर डाल कर पड़े हो, एक धक्का भी नही मारा तुमने. दे दूँगी अड्रेस…पहले ये काम फीनिस करो.”

“धन्यवाद आपका, ये लीजिए अब आपकी रेल बनेगी.” रोहित ने कहा और बिस्तर पर तूफान मचा दिया.

वो इतनी ज़ोर से धक्के मार रहा था कि बेड भी आवाज़ करने लगा.

“आअहह एस… प्लीज़ कंटिन्यू….अब मत रुकना.”

“हाहहाहा…..वैसे एक सवाल बाकी है अभी …”

“क्या नहियीईई प्लीज़ मेरा ऑर्गॅज़म हो जाने दो. मैं बहुत नज़दीक हूँ. प्लीज़…कंटिन्यू आआहह.”

“जस्ट जोकिंग सिमरन, एंजाय युवर ऑर्गॅज़म.”

क्रमशः........................

......

BAAT EK RAAT KI--84

gataank se aage.................

“nazar to bahut kuch aaya magar angoor kuch is tarah jor maar rahein hain aapke top ke piche se ki dekhta hi rah gaya. they are very sharp, kahi phaad na dein aapke top ko.”

“atcha.”

“ji haan, vaise aap bahut atchi lag rahi hain.”

“flirt mein to maahir hain aap. Baithiye aap main chaaye laati hun. Kuch to lena hi padega aapko.”

Rohit ne aage badh kar simran ka haath pakad liya aur is se pahle ki vo kuch samajh paati uske honto ko apne honto mein jakad liya.

“ummmm… chodiye.” Simran ne kaha.

“chaaye kyon la rahi hain. Main bahut kuch lene waala hun aap chinta na karein. …”

“vaise chaaye ke baad main jyada excited fil karti hun…soch lijiye.”

“uff agar aisa hai to chaaye mujhe bhi dijiye…vaise chaaye mein kuch milaati to nahi hain aap .. …”

“nahi bas simple chaaye leti hun main.”

“cool, le aaiye chaaye, I am waiting.”

Rohit sofe par baith gaya. simran kitchen mein chali gayi.

Kuch der baad simran chaaye le kar aayi. Ek cup usne rohit ko de diya aur ek cup khud lekar rohit ke saamne dusre sofe par baith gayi.

Rohit ko na jaane kyon simran par kuch shak ho raha tha. vo sofe se utha aur bola, “aaiye apne cup exchange kar lete hain, is se pyar badhta hai.”

Rohit ko lag raha tha ki agar usne uske cup mein kuch milaaya hoga to vo cup exchange karne se mana kar degi. Magar simran ne chupchaap muskuraate hue cup exchange kar liye.

“hmm atchi chaaye banaayi hai aapne. Dekhne wali baat ab ye hai ki aap kitni excite hoti hain chaaye pe kar. Shaayad mujhe excitement mein ek blow job mil jaaye.”

“hahaha…itni bhi excite nahi hoti hun main ki kisi ka dick muh mein le lun.”

“vaise itna excite karne ke liye kya karna hoga mujhe, I want to place my dick betwin your beautiful lips.” Rohit ne hanste hue kaha.

“tum kuch nahi kar sakte, I don’t like sucking. …” simran bhi hanste hue boli.

Rohit simran ke paas aaya aur use uska haath pakad kar sofe se utha liya aur bola, “aapko kya pasand hai aur kya nahi vo sab hum baad mein dekhenge, mujhe apne angoor de dijiye philhaal …”

“angoor khatte hue to ?”

“itni sunder bagiya ke angoor khatte ho hi nahi sakte.” Rohit ne kaha aur simran ke top ko utaarne laga.

“vaise chakh kar dekh leta hun abhi ..”

“Bade utaavle ho rahe hain aap. Rukiye thodi der. Thoda baat chit to kar lein.”

“baat chit bhi hoti rahegi aur kaam bhi hota rahega …” Rohit ne kaha aur ek jhatke mein simran ka top utaar kar sofe par fenk diya.

“arey ye angoor to bina bra ke hi top ke piche chupe the. Tabhi kahu kyon takkar maar rahe hain top mein. You have got beautiful boobs simran.”

“atcha”

“haan, bahut sunder hain…let me suck them now.” Rohit ne simran ke baayein boobs ko thaam liya aur uske nipples ko choosne laga.

“aaahhh….itni jaldi sab shuru ho jaayega maine socha nahi tha.”

“aapne mujhe ghar bula liya apne to jaldi to mujhe karni hi thi hehehe.”

“you are dirty cop.”

“I know, but I am harmless…”

“aaahhh dant maar diye aur bolte ho harmless …”

“sorry…sorry…sorry hadbadi mein gadbadi ho gayi.” Rohit ne hanste hue kaha.

“nikaalo apna penis baahar main bhi daant maarungi.”

“will you suck it par tum to like nahi karti na.” rohit ne kaha.

“suck nahi karungi balki daant maarungi…nikaalo baahar.”

“ok by the way my dick likes adventure, dekhte hain ki kya karogi tum.” rohit ne apni zip khol kar apne ling ko baahar khinch liya.

“hmm… nice dick…now I will give the same treatment to your dick which you have given to my nipples. Are you ready.”

“always ready for you, come on suck it hard and nice.” Rohit ne kaha.

Simran rohit ke saamne ghutno ke bal baith gayi aur uske ling ko apne honto ke bich daba liya.

“aaaahhh very good, please continue….” Rohit ne kaha. Magar agle hi pal rohit karaah utha, “ouch.”

“kya hua rohit.” Simran ne pucha.

“yaar tumne sach mein daant maar diye, ye sach mein adventure ho gaya. ab aapke muh mein lund rakhna khatre se khaali nahi…aapki chut hi thik rahegi lund rakhne ke liye.”

“galti se lag gaye daant. Sorry…maine intentionally nahi kiya.”

“its ok…but I can’t take the risk…please aapki chut ko saamne laayein aur hamein sukhad parvesh pardaan karein.”

Rohit ne simran ko apni godi mein utha liya aur bola, “chaliye aapke bedroom mein chalte hain. Agar yahi drawing room mein hi thukvaani hai to vo bhi bol dijiye.”

“nahi mera makhmali bistar mujhe atcha lagta hai. fil fri to take me there.”

Rohit simran ko uske bedroom mein le aaya aur turant uske saare kapde utaar diye. Khud ke kapde utaar kar vo simran ke upar chadh gaya aur bola, “pahli baar sambhog mein utar rahe hain hum dono. Mere lund ko kis position mein parvesh dena pasand karengi aap.”

“hmm…I always prefer missionary position. Rest upto you.”

“ab aapko jo pasand hai usi position mein parvesh karenge. Taange khol kar meri kamar par kash lijiye aapko ek lambe safar pe le ja raha hun main ..”

“atcha…”

“ji haan bilkul.”

Rohit ne simran ki taange khol kar uski yoni par apna ling tika diya aur jyada vakt na gavaate hue ek dhakke mein apne ling ko takriban aadha simran ki yoni mein sarka diya. Simran karaah uthi, “ooohhhh yes…”

“wow what a smooth pussy you have. Very nice. Lijiye ab pura jakad lijiye mere lund ko.” rohit ne khud ko pura dhakail diya simran ki yoni mein. Is dauraan simran ne bistar ki chaadar ko pure jor se muthi mein bhinch rakha tha.

“ufff aapne jaan nikaal di meri.”

“itni jaldi jaan nikal gayi, abhi jab aapki rail banegi tab kya hoga …”

“rail banegi matlab… … kya matlab hai tumhaara.”

“kuch nahi ghabraaye nahi majaak kar rahe hain hum. Ab agar aapki izaazat ho to hum aapki thukaayi kar lein.”

“kijiye na hamne roka hai kya, vaise rail ka matlab kya tha …”

Rohit ne bina kuch kahe simran ki yoni ko apne ling se ragadna shuru kar diya aur bola, “rail ka matlab bhi pata chal jaayega, jara dharya rakhein.”

Kuch hi minto mein simran ki shiskiyan gunj rahi thi kamre mein. Vo apne dono paanv patak rahi thi bistar par.

“uuuhhhhh rohit please rukna mat aaaahhhh”

Ye sunte hi rohit ruk gaya aur simran ki yoni se apna ling nikaal liya aur bola, “ab ek swaal hai.”

“what majaak mat karo, jaldi vaapis daalo, mera orgasm rok diya tumne …” simran ne niraashaa bhare shabdo mein kaha.

“daal dunga vaapis pahle vivek bhai ki tarah kuch sawaal puch lun …”

“ye kya majaak hai rohit, please daal do na.” simran gidgidaayi.

“pahle ye bataao ki tumhaari black scorpio kaha hai.”

“yaar tum yahan apni investigation pe aaye ho ya phir mujhse milne ….”

“duty sabse pahle hai, baaki kaam baad mein. Aapne bhi to aaj din mein mujhe apne office se chale jaane ko bol diya tha. mujhe apne sawaalo ke jawaab chaahiye, agar jawaab nahi milega to aapki chut pyasi rah jaayegi.”

“ye to had ho gayi. Kisi ne mere saath aisa nahi kiya.”

“bataao na mujhe ki kaha hai tumhaari car. Kyon jhijak rahi ho. Jaldi se bataao, I will fuck you even harder after that.”

“car mere boy friend ke paas hai. vo delhi le gaya hai drive karke. Kal shaam tak laut aayega. Tumhe apne boy friend ke baare mein bataana nahi chaahti thi isliye jhijak rahi thi.”

“hmm… kya naam hai tumhaare boy friend ka.”

“us se tumhe kya matlab? Tum mujhse matlab rakho.”

“matlab hai mujhe. Shahar mein psycho ne aatank machchaa rakha hai aur vo black scorpio lekar ghumta hai. kya aksar tumhaari car tumhaare boy friend ke paas hoti hai.”

“haan hoti to hai…tumhe kya lena dena, hato mere upar se I don’t want your dick anymore.”

Magar rohit ne turant apne ling ko simran ki yoni mein daal diya.

“aaahhhhh… ab kyon daala tumne.”

“kaafi sawaalo ke jawaab mil gaye isliye. Please bataao na ki kaun hai tumhaara boy friend.”

“sanjay naam hai uska…”

“hmm…love affair chal raha hai kya tumhaara uske saath.”

“paagal ho kya, he is married or agar love affair chal raha hota to tum apna ye blackmailing dick daal kar nahi pade hote mere ander. He is just time paas.”

“time paas friend…vaah maan gaya aapko ….” Rohit hansne laga.

“hanso mat aur ab apna kaam karo.”

“bas ek aur sawaal.” Rohit ne kaha.

“ab kya hai…lagta hai tumhaara sambhog ka mood nahi hai.”

“bas sanjay ka address de dijiye mujhe.”

“kya uska address kyon du tumhe. Tum us par shak mat karo. Vo bahut sharif banda hai.”

“sharif bande ki hi talaash hai mujhe. Mujhe lagta hai psycho koyi sharif banda hi hai jis par ki hamaari nazar nahi gayi ab tak. Vaise ye andaaza hi hai.”

“yaar tum psycho ko pakdo jaakar mera kyon mood kharaab kar rahe ho. Kab se ander daal kar pade ho, ek dhakka bhi nahi maara tumne. De dungi address…pahle ye kaam finis karo.”

“dhanyavaad aapka, ye lijiye ab aapki rail banegi.” Rohit ne kaha aur bistar par toofan machchaa diya.

Vo itni jor se dhakke maar raha tha ki bed bhi awaaj karne laga.

“aaahhhh yes… please continue….ab mat rukna.”

“hahahaha…..vaise ek sawaal baaki hai abhi …”

“kya nahiiiiii please mera orgasm ho jaane do. Main bahut nazdik hun. Please…continue aaaahhhh.”

“just joking simran, enjoy your orgasm.”

Kramashah..............................